उत्तराखंड
कोटद्वार नगर निगम चमचमाते बोर्ड या पैसों की बंदरबाँट?विकास के क्षेत्र में विधायिका से आगे निकले पार्षद…
कोटद्वार नगर निगम के 40 वार्डों में 40 पार्षद हैं ओर एक उनके आका मेयर…..हाल ही में नगर निगम ने पार्षदों के आवास पर उनके नाम के बोर्ड लगवाए हैं,जिनकी कुल लागत लगभग 10 लाख रुपये बताई जा रही है। यानी प्रत्येक बोर्ड पर औसतन ₹25,000 खर्च।ये बोर्ड इतने बड़े और चमकदार हैं कि स्थानीय विधायिका व उत्तराखंड की विधानसभा अध्यक्ष का बोर्ड इन महान पार्षदों के आगे बौना ओर फीका नजर आ रहा है।लेकिन सादगी और दिखावे में अंतर होता है।

कोटद्वार के 40 पार्षदों ने इतना विकास कर दिया है कि बोर्डों पर साफ नजर आ रहा है।जनता की मेहनत की कमाई से दिए हुए टैक्स का दुरुपयोग है।10 लाख रुपये बोर्डों पर खर्च करने की जगह पुराने बोर्डों को पोत कर उन्हीं को उपयोग में लाया जा सकता था।
शहर में सड़कें टूटी हुई हैं, नालियाँ भरी पड़ी हैं, पानी की समस्या बनी हुई है, कूड़ा-करकट हर तरफ बिखरा है और बुनियादी सुविधाओं की कमी हर नागरिक महसूस कर रहा है।
पार्षदों की जिम्मेदारी भी बनती है कि ऐसी फिजूलखर्ची पर विरोध प्रकट करते…उनका काम क्षेत्र की जनता की समस्याओं का निदान करना है न कि बोर्ड की चमक दिखानी है।यदि उनको बताए बिना यह कार्य किया गया है उस स्थिति में सभी को एकजुट होकर आयुक्त ओर मेयर से वार्ता करनी चाहिए थी।10 लाख रुपये के बोर्ड आखिर किस चहेते को फायदा देने के लिए बनवाये गए।
वही कॉंग्रेस से मेयर प्रत्याशी रहीं रंजना रावत का कहना है कि उत्तराखंड की विधानसभा अध्यक्ष व कोटद्वार की भाजपा से विधायिका हैं उनके आवास का बोर्ड साधारण बना हुआ है जोकि अच्छा भी प्रतीत हो रहा है।वही पार्षदों के इतने बड़े बड़े बोर्ड अतिक्रमण को भी बढ़ावा दे रहे हैं।आपकी पहचान काम से होनी चाहिए बोर्ड से नहीं।
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