उत्तराखंड
स्कूली बच्चों के ट्रैक सूट पर विधायक का नाम, क्या बच्चों को बनाया जा रहा राजनीतिक प्रचार का माध्यम

यमकेश्वर की विधायक रेनू बिष्ट ने पानी की टंकियों पर अपना नाम लिखवा कर जनता को बांटने का कार्य किया था जो अब नेताओं का चलन बन गया है।हर कोई होड़ में लगा है कैसे वोटर को लुभाया जाए काम करते नही हैं और आखिरी में अपने नाम के बैग,ट्रेक सूट,बर्तन व अन्य सामग्री पर अपने चेहरे और नाम को याद रखवाने का प्रयास किया जाने लगा है।हासिल ही में ऋतु ने पूर्व सैनिकों को बैग बांटे जिस पर खूब थू थू हुई।अब लैंसडाउन विधायक के द्वारा स्कूली बच्चों को दिए गए ट्रेक सूट चर्चा का विषय बना हुआ है।शिक्षा जिसे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण आधार माना जाता हैआज उसी शिक्षा का प्रयोग राजनीतिक प्रचार के लिए किया जा रहा है।जहाँ स्कूली बच्चों को दिए ट्रेक सूटों पर विद्यालय का नाम या कोई प्रेरणादायक संदेश होना चाहिए था वहाँ लैंसडाउन के विधायक महंत दिलीप सिंह रावत का नाम छापकर प्रचार किया जा रहा है।आखिर स्कूली बच्चों को प्रचार का माध्यम क्यों बनाया जा रहा है? क्या स्कूली बच्चों को भी राजनीति का हिस्सा बनाया जा रहा है?यह गम्भीर विषय है।क्या यही विकास की तस्वीर है जहाँ बच्चों की पहचान उनके विद्यालय से नहीं बल्कि नेताओं के नाम से कराई जा रही है?शिक्षा का उद्देश्य बच्चों का भविष्य बनाना है,न की उन्हें राजनीतिक प्रचार का माध्यम बनाना।और सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब चुनाव का समय आएगा और आचार संहिता लागू होगी,ओर बच्चे इन कपड़ों को पहनकर स्कूल जाते हैं तब क्या आचार संहिता का उलंघन नहीं होगा।


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