उत्तराखंड
कोटद्वार में जनसमस्याओं की अनदेखी से परेशान जनता,निगम व जनप्रतिनिधि बने मूकदर्शक
कोटद्वार-कोटद्वार नगर निगम में मेयर का एक साल का कार्यकाल पूरा हो चुका है…लेकिन शहर की जमीनी समस्याएँ आज भी जस की तस बनी हुई हैं।मेयर की अक्सर सभी विभागों को लेकर बैठक करने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर नजर आती रहती हैं।ऐसा प्रतीत होता है विभाग सुनते नहीं है सड़कों के किनारे नालियां नही बनी होने के कारण सारा पानी सड़कों पर बहता रहता है।विधानसभा अध्यक्ष के कार्यालय,जौनपुर व अन्य कई स्थानों की यही स्थिति है।लेकिन शायद वह बैठक तक ही सीमित रह जाती है।तस्वीरों में देख सकते हैं स्टेशन की स्थिति क्या है।वहाँ के दुकानदार परेशान हैं।जलभराव होने के कारण रोजीरोटी पर भी संकट गहराने लगा है।बरसात नहीं होने पर भी वहां पानी भरा रहता है।आखिर जीतने के बाद जनता की परेशानियों को क्यों दरकिनार कर दिया जाता है।चहेतो पर ही कृपा बरसती है।जनता की रोजमर्रा की समस्याओं का निदान करना जनप्रतिनिधि ओर निगम का होता है

वहीं बंदरों का कुत्तों का आतंक शहर के कई इलाकों में लोगों की दिनचर्या को प्रभावित कर रहा है।बंदर घरों में घुसकर सामान उठाना,राहगीरों पर हमला….ये सब अब आम बात हो गई है लेकिन नगर निगम की ओर से अब तक कोई प्रभावी समाधान नहीं दिखा।
कोटद्वार में आवारा पशुओं की समस्या भी गंभीर होती जा रही है और सड़कों पर घूमते आवारा पशु हादसों को न्योता दे रहे हैं।
सफाई व्यवस्था,टूटी सड़कें,जलभराव जैसी समस्याओं के साथ-साथ इन गंभीर मुद्दों पर भी मेयर का एक साल का कार्यकाल सवालों के घेरे में खड़ा नजर आता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वादे बहुत हुए,लेकिन धरातल पर काम कम दिखाई दिया।
अब देखने वाली बात यह होगी कि आने वाले समय में मेयर इन ज्वलंत समस्याओं पर ठोस कदम उठाते हैं या नहीं।
लेटेस्ट न्यूज़ अपडेट के लिए -
