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KEDAR DARPAN (केदार दर्पण)

उत्तराखंड

कोटद्वार के बेस अस्पताल में शौचालयों में ताले पड़े होने से महिला मरीजों व महिला तीमारदारों को हो रही खासी परेशानी,तीमारदार व मरीज खुले में जाने को मजबूर

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कोटद्वार-जहां एक ओर सरकार शहरों से लेकर गांवों तक स्वच्छता अभियान के तहत शौचालय निर्माण के प्रयास कर रही है, वहीं कोटद्वार के बेस अस्पताल में स्थित सार्वजनिक शौचालयों में ताले पड़े हुए हैं।अस्पताल में आने वाले मरीजों और उनके साथ तीमारदारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।बेस अस्पताल में शौचालय का निर्माण विशेष रूप से मरीजों और अस्पताल आने वाले लोगों की सुविधा के लिए किया गया था।शौचालय के दरवाजे पर लगे ताले ने मरीजों के लिए अतिरिक्त मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।अस्पताल प्रशासन के आला अधिकारियों को इस समस्या की जानकारी होने के बावजूद भी शौचालय के ताले नही खोले गए हैं।यह प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करता है।


अक्सर शौचालय निर्माण कार्यों की समीक्षा बैठकों का आयोजन किया जाता है और स्वच्छ भारत मिशन के तहत स्कूलों,घरों और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर शौचालय बनाने का कार्य निरंतर चल रहा है।लेकिन अस्पताल में बने महिला व पुरूष प्रसाधनों पर पड़े ताले अभियान की वास्तविकता पर सवाल खड़ा करता है।बेस अस्पताल में स्थित शौचालयों की हालत और भी जटिल हो जाती है जब महिला मरीजों की बात आती है। अस्पताल में दूर-दराज से आने वाली महिलाएं शौचालय का रुख करती हैं, लेकिन वहां ताला देखकर उन्हें इधर-उधर भटकने के लिए मजबूर होना पड़ता है। यह स्थिति महिला मरीजों के लिए और भी कठिनाईपूर्ण हो जाती है।स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है,वही दूसरी ओर बेस अस्पताल में ही बने शौचालयों में लटके ताले अभियान की सफलता पर सवाल खड़ा करते है।सफाई व्यवस्था भी पूरी तरह से चौपट दिखाई दे रही है।जिसके लिए पूरी तरह से अस्पताल प्रशासन है।अस्पताल प्रशासन को तुरंत इस मुद्दे को गंभीरता से लेना चाहिए और शौचालयों को मरीजों व तीमारदारों के लिए खोलने की दिशा में कदम उठाना चाहिए ताकि लोगों को असुविधा का सामना न करना पड़े।वही पीने के पानी पर पन्नी लपेट कर बन्द किया हुआ है।जिसकी वजह से तीमारदारों को बार बार पीने के पानी के लिए नीचे जाना पड़ता है या बाहर से लाने को मजबूर हैं।

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