उत्तराखंड
नवरात्र पर जिले की 10 बेटियों की शिक्षा को जिला प्रशासन ने किया पुनर्जीवित
देहरादून: नवरात्र के पावन अवसर पर ऋषिपर्णा सभागार कलेक्ट्रेट में आयोजित ‘नंदा-सुनंदा’ 14वें संस्करण में जिलाधिकारी सविन बसंल ने 10 बालिकाओं की शिक्षा को पुनर्जीवित कर उन्हें देवियों के रूप में सम्मानित किया। इस अवसर पर कुल 2.03 लाख रुपये के चेक वितरित किए गए।
मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन द्वारा संचालित प्रोजेक्ट ‘नंदा-सुनंदा’ के तहत अब तक 136 से अधिक असहाय और जरूरतमंद बालिकाओं की शिक्षा पुनर्जीवित की जा चुकी है। यह पहल समाज के कमजोर वर्गों की बेटियों के लिए आशा की किरण बनकर उभरी है और बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने का प्रभावी मॉडल साबित हो रही है।

इस कार्यक्रम में शामिल बालिकाओं की शिक्षा उनके परिवार में हुए आर्थिक संकट और व्यक्तिगत घटनाओं के कारण बाधित हो गई थी। उदाहरण के लिए बनियावाला निवासी आराध्या सिंह, माही चौहान, सोफिया अल्वी, अनुष्का शर्मा, हर्षिता और त्रिशा जैसी बालिकाओं की पढ़ाई उनके पिता की मृत्यु, माता के गंभीर रोग या परिवार की आर्थिक कठिनाइयों के कारण बाधित हुई थी। जिला प्रशासन ने इन सभी की शिक्षा को पुनर्जीवित कर उनका भविष्य सुरक्षित बनाया।
जिलाधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री का संकल्प है कि हर जरूरतमंद बालिका को शिक्षा का अधिकार मिले। इस पहल का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता प्रदान करना नहीं…बल्कि बालिकाओं को शिक्षित कर उनके उज्ज्वल भविष्य की नींव मजबूत करना है। उन्होंने चयन समिति और ग्राउंड टीम की मेहनत की भी सराहना की।
मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने कहा कि बालिकाएं अपनी पढ़ाई पर ध्यान दें और जरूरत पड़ने पर प्रशासन हमेशा सहायता करेगा। वहीं पुलिस अधीक्षक नगर प्रमोद कुमार ने बताया कि प्रोजेक्ट ‘नंदा-सुनंदा’ समाज के लिए प्रेरणादायी पहल है और पुलिस बालिकाओं एवं उनके परिवारों की हर संभव मदद के लिए तत्पर है।
कार्यक्रम में मुख्य शिक्षा अधिकारी विनोद कुमार ढौंडियाल, जिला कार्यक्रम अधिकारी बाल विकास जितेन्द्र कुमार और जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे।
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