उत्तराखंड
सरकार की मनमानी पर प्रदर्शनकारियों में आक्रोश, उत्तराखंड में डिप्लोमा इंजीनियर्स का धरना
उत्तराखंड में अपनी लंबित मांगों को लेकर डिप्लोमा इंजीनियर्स ने अब खुलकर विरोध जताना शुरू कर दिया है। राजधानी देहरादून में उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ के बैनर तले बड़ी संख्या में इंजीनियर्स धरने पर बैठ गए हैं। कर्मचारियों में शासन की कार्यशैली को लेकर नाराजगी साफ दिखाई दे रही है। बताया जा रहा है कि करीब 9 महीने पहले महासंघ और शासन के बीच कुछ अहम मुद्दों पर सहमति बनी थी। उम्मीद थी कि जल्द ही इन फैसलों पर अमल होगा, लेकिन समय बीतने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी रही। अब तक न तो कोई स्पष्ट आदेश जारी हुआ और न ही ज़मीनी स्तर पर कोई बदलाव देखने को मिला। धरने में शामिल इंजीनियर्स का कहना है कि वेतनमान और ग्रेड पे से जुड़े मुद्दे लंबे समय से अटके हुए हैं। इससे न केवल कर्मचारियों के बीच असमानता बनी हुई है, बल्कि मनोबल पर भी असर पड़ रहा है। उनका कहना है कि इस दौरान कई बार अधिकारियों से बातचीत की गई, ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन नतीजा अब तक शून्य ही रहा। इंजीनियर्स की मुख्य मांगें हैं: ड्राफ्ट्समैन के पद का वेतन जूनियर इंजीनियर के बराबर किया जाए जूनियर इंजीनियरों को 2005 से 4600 ग्रेड पे का लाभ दिया जाए 10 साल की सेवा पूरी होने पर 5400 ग्रेड पे दिया जाए महासंघ से जुड़े लोगों का कहना है कि ये मांगें नई नहीं हैं, बल्कि लंबे समय से लंबित हैं। उनका कहना है कि कई दौर की बातचीत के बाद भी जब कोई ठोस नतीजा नहीं निकला, तो आखिरकार उन्हें धरने का सहारा लेना पड़ा। धरने के चलते विभागीय कामकाज पर असर पड़ने की आशंका भी जताई जा रही है, क्योंकि बड़ी संख्या में तकनीकी कर्मचारी इसमें शामिल हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में विकास कार्यों की रफ्तार प्रभावित हो सकती है। फिलहाल, इस पूरे मामले पर शासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, माना जा रहा है कि जल्द ही दोनों पक्षों के बीच बातचीत की कोशिश की जा सकती है, ताकि कोई रास्ता निकाला जा सके।
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