Uncategorized
कोटद्वार के लगभग सभी सरकारी कार्यालयों में अग्निरोधक उपकरण की वैधता समाप्त,तहसील व निगम में नहीं लगे हुए हैं अग्निरोधक उपकरण,अधिकारियों की लापरवाही जनता को पड़ सकती है भारी
कोटद्वार-कोटद्वार-उत्तराखंड के कोटद्वार शहर में स्थित सरकारी विभागों के दफ्तरों में एक गंभीर लापरवाही सामने आई है।यहां के सरकारी दफ्तरों में अग्निरोधक उपकरण या तो लगे हुए ही नही हैं, किसी किसी दफ्तर में लगे भी हैं तो उनकी एक्सपायरी हो चुकी है।आज हमारे द्वारा सभी दफ्तरों में जाकर देखा गया।इनमें तहसील, डीएफओ कार्यालय,पोस्टऑफिस,एएसपी कार्यालय,सीओ कार्यालय,थाना,बेस अस्पताल व नगर निगम में जाकर देखा।

सबसे पहले हम बात करते हैं शहर के सबसे अहम क्षेत्र तहसील की।कोटद्वार की तहसील में सभी कक्ष में देखने पर एक भी अग्निरोधक उपकरण नही पाया गया।एक मात्र कक्ष था जिसमे अग्निरोधक उपकरण था वह भी 2017 का पाया गया।अगर कभी कोई दुर्घटना हो जाती है उस स्थिति में सारे दस्तावेज जलकर खाक हो जायेंगे और जान माल का नुकसान भी हो सकता है।उन अहम दस्तावेजों के स्वाह हो जाने से आम जनमानस को कितनी परेशानी का सामना करना पड़ेगा,सोचनीय विषय है।डीएफओ कार्यालय मे अग्निरोधक उपकरण 2022-23 के लगे हैं।बेस अस्पताल में कुछ उपकरण जरूर नए लगे हैं,लेकिन इमरजेंसी के बाहर लगे अग्निरोधक उपकरण की डेट एक्सपायर हो चुकी है।यह स्थिति किसी एक कार्यालय की नही है ओर अग्निरोधक उपकरण न होना कार्यालयों के अधिकारियों की लापरवाही को दर्शाता है।लेकिन तहसील में एक भी अग्निरोधक उपकरण न लगा होना गम्भीर विषय है।यह स्थिति सुरक्षा के लिहाज से बेहद चिंताजनक बन गई है।थाने में आग बुझाने के बाल्टी रखी हुई हैं।एएसपी से पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि बाल्टियां लगी हुई हैं साथ ही सभी जगह फायर एक्सटिंग्विशर भी जल्द लगवा दिए जायेंगे।
विभिन्न सरकारी कार्यालयों में आग बुझाने के लिए जरूरी अग्नि सुरक्षा उपकरण जैसे कि अग्नि यंत्र,फायर एक्सटिंग्विशर और रेत से भरी बाल्टियां व पानी के स्रोत आदि की व्यवस्था की जाती है।विभागीय अधिकारियों ने इन उपकरणों की डेट चेक कर बदलवाने का कष्ट उठाना जरूरी नहीं समझा ओर अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ सकता है।
यह स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब इन सरकारी दफ्तरों में कर्मचारियों और आम नागरिकों की भी मौजूदगी रहती है।एक ओर जहां आगजनी की घटनाएं कभी भी हो सकती हैं,वहीं दूसरी ओर ऐसी लापरवाही से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।यदि प्राइवेट प्रॉपर्टीज में इस तरह की खामियां पाई जाती हैं तुरंत कार्यवाही हो जाती है लेकिन अधिकतर सरकारी कार्यालय में इतनी बड़ी कमी पाए जाने पर न तो उच्च अधिकारी कुछ करते हैं न ही सम्बंधित विभाग…
वही एफएसओ रमेश कुमार गौतम ने बताया कि यह उपकरण 2000 से 2500 रुपये तक का आता है।उनका कहना है कि सभी विभागों को अग्निरोधक उपकरण लगवाने के लिए कई बार कहा गया है लेकिन अधिकारी विभाग में बजट न होने का रोना रो देते हैं।मेरे द्वारा प्रत्येक शुक्रवार को चैकिंग की जाती है।




