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वन्य जीवों से तो कभी आपदा से परेशान ग्रामीणों की सरकार कब लेगी सुध
कोटद्वार-पौड़ी गढ़वाल के कलेथा गांव में इन दिनों दहशत का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि दिन मे भी वन्य जीवों की चहल कदमी देखी जा रही है।बाघ और तेंदुए गांव के आसपास मंडराते रहते हैं।हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि लोग दोहपर बाद घरों में कैद होने को मजबूर हैं।

ग्रामीणों के अनुसार जंगली जानवर अब जंगल तक सीमित नहीं रहे…बल्कि आबादी वाले इलाकों में घुसकर मवेशियों को अपना शिकार बना रहे हैं। कुछ घटनाओं में इंसानों पर भी हमले की आशंका जताई जा रही है, जिससे गांव में भय का वातावरण और गहरा गया है। बच्चों और बुजुर्गों को घर से बाहर निकालना मुश्किल हो गया है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि गांव के रास्तों पर पर्याप्त रोशनी नहीं है, जिससे खतरा और बढ़ जाता है। उन्होंने मुख्य रास्तों और संवेदनशील स्थानों पर स्ट्रीट लाइट लगाने की मांग की है। साथ ही जंगल की ओर मजबूत बाड़ (फेंसिंग) लगाए जाने की भी मांग उठाई है….ताकि जंगली जानवरों की आवाजाही रोकी जा सके।
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि बाघ और तेंदुए खेतों में घुसकर फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। खेती करना दिन-ब-दिन मुश्किल होता जा रहा है। मेहनत से तैयार की गई फसलें जंगली जानवरों के कारण बर्बाद हो रही हैं…जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।
वही बरसात में नदी का जलस्तर इतना बढ़ जाता है कि हफ़्तों तक घर मे कैद होकर रह जाते हैं और बच्चे स्कूल नहीं जा पाते हैं।घर का कुछ भी सामान लेन के लिए कई नदियों को पार करके जाना पड़ता है।सरकार नदी पर पुल बनवा दे तो ग्रामीणों को राहत मिल जाएगी।बरसात में सबसे ज्यादा समस्या बीमारी को लेकर जाने में होती है।
गांववासियों ने वन विभाग और प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो किसी बड़ी अनहोनी से इनकार नहीं किया जा सकता।फिलहाल कलेथा गांव के लोग डर के साये में जीने को मजबूर हैं एक तरफ वन्य जीवों का खतरा दूसरी ओर बरसात में नदियों का उफान पर हो जाना विकट समस्या बनी हुई है।और प्रशासन से राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
अब देखना होगा सरकार और प्रशासन ग्रामीणों की समस्याओं का निवारण करती है या हमेशा की तरह लॉलीपॉप देकर खिसक जाती है।
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