कोटद्वार
नाबालिग से दुष्कर्म मामले में पहली बार होटल संचालकों पर कार्यवाही,कोटद्वार पुलिस ने संचालक भेजे जेल
कोटद्वार में नाबालिग से जुड़े संवेदनशील मामले में पुलिस जांच के दौरान एक बड़ा खुलासा सामने आया है। दुष्कर्म प्रकरण में अब होटल संचालकों की भूमिका भी उजागर हुई है, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है।
यह मामला 1 अप्रैल 2026 को सामने आया था, जब कोटद्वार निवासी एक व्यक्ति ने कोतवाली में शिकायत दी कि उनकी 16 वर्षीय पुत्री 31 मार्च को सुबह घर से बिना बताए चली गई और वापस नहीं लौटी। इस पर पुलिस ने तत्काल अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर पुलिस टीमों का गठन किया गया और तेजी से कार्रवाई की गई। तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर तंत्र की मदद से पुलिस ने 3 अप्रैल को इस मामले में संलिप्त मुख्य आरोपी विमल रावत और कृष्णा भट्ट को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में पहली बार होटल संचालक पर कार्यवाही हुई है इससे कहीं न कहीं होटल संचालकों में डर पैदा होगा और नाबालिगों को होटल के कमरे देने से बचेंगे।अपराध में होटल संचालकों की भूमिका सामने आने पर उनके खिलाफ पुलिस के द्वारा की गई कार्यवाही से कोटद्वार पुलिस की सराहना की जा रही है।
जांच को आगे बढ़ाते हुए पुलिस ने जब पूरे घटनाक्रम की गहराई से पड़ताल की, तो एक अहम तथ्य सामने आया। घटना वाले दिन आरोपियों को कोटद्वार के एक होटल में बिना किसी वैध पहचान पत्र के कमरा दिया गया था। इतना ही नहीं, होटल रजिस्टर में भी उनकी कोई प्रविष्टि नहीं की गई थी।
पूछताछ में यह बात सामने आई कि होटल संचालकों ने जानबूझकर अधिक पैसे लेकर नियमों का उल्लंघन करते हुए आरोपियों को कमरा उपलब्ध कराया। पुलिस के अनुसार, होटल संचालक शुभम रावत और सोनू ने न केवल लापरवाही बरती, बल्कि इस पूरे मामले में आरोपियों के साथ साजिश और दुष्प्रेरण करते हुए सक्रिय सहयोग भी किया।
इन्हीं तथ्यों के आधार पर पुलिस ने मामले में और गंभीर धाराएं जोड़ते हुए 9 अप्रैल 2026 को दोनों होटल संचालकों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय में पेश कर आगे की वैधानिक कार्यवाही की जा रही है।
इस मामले में अब भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं के साथ-साथ पॉक्सो एक्ट की धाराएं भी लागू की गई हैं, जो इस अपराध की गंभीरता को दर्शाती हैं।पुलिस की इस कार्रवाई से साफ संदेश गया है कि नाबालिगों से जुड़े अपराधों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या सहयोग करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
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