देहरादून
देहरादून: न्यायालय की अवमानना और अभद्र व्यवहार पर वरिष्ठ अधिवक्ता के लाइसेंस रद्द करने की संस्तुति
देहरादून। जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय देहरादून में न्यायालय की गरिमा को ठेस पहुंचाने और अनुशासनहीन व्यवहार के मामले में एक वरिष्ठ अधिवक्ता के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
जानकारी के अनुसार वरिष्ठ अधिवक्ता के खिलाफ अधिवक्ता अधिनियम 1961 के तहत कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति करते हुए उनका वकालती लाइसेंस रद्द करने का प्रस्ताव राज्य बार काउंसिल और बार काउंसिल ऑफ इंडिया को भेजा गया है।
न्यायालय में अभद्र व्यवहार का आरोप
बताया गया है कि 25 मार्च 2026 को सुनवाई के दौरान संबंधित अधिवक्ता ने न्यायालय की कार्यवाही में बाधा डाली और पीठासीन अधिकारी के प्रति आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। अधिकारियों के अनुसार यह व्यवहार न्यायालय की गरिमा और नियमों के खिलाफ है और इसे गंभीर पेशेवर कदाचार (Professional Misconduct) माना गया है।
पहले भी लगते रहे हैं आरोप
सूत्रों के मुताबिक, अधिवक्ता पर पहले भी कई बार अदालत में अभद्र व्यवहार, चिल्लम-चिल्ली और दबाव बनाने जैसे आरोप लग चुके हैं। यह भी बताया गया है कि वे पहले राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासूका) के तहत निरुद्ध रह चुके हैं और उनके खिलाफ अन्य आपराधिक मामले भी चल रहे हैं।
पहली बार ऐसी सख्त सिफारिश
यह मामला इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि राज्य में पहली बार किसी अधिवक्ता का लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर भेजी गई है।
कोर्ट का सख्त संदेश
जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय ने साफ कहा है कि न्यायालय की अवमानना, अनुशासनहीनता और अभद्र व्यवहार किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि कानून और मर्यादा से कोई समझौता नहीं होगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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